
" प्यार का आकार ".
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"प्यार कर बैठने का ख़ुमार, कई दिन उसके साथ रहा. वो प्यार जिससे ‘प्यार की परिभाषा’ लिखी गयी थी. पर प्यार कर बैठने के कुछ दिनों बाद प्यार हाथों से छूटता जाता था. ये बात ‘प्यार की परिभाषा’ में सोच समझकर नहीं लिखी गयी थी, या मिटा दी गयी थी, जैसे कोई गैरज़रूरी जानकारी जिसे अक्सर परिभाषाओं से दूर रखा जाता है. ये परिभाषा के संक्षिप्त होने का रिवाज है, जिसे प्यार के विस्तार पर भी लागू होना पड़ता है."
पूरी कहानी यहाँ पढ़िए: http://www.jankipul.com/2016/03/blog-post_5.html
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