Wednesday, March 2, 2016

गरम तवा

कुछ जला नहीं था अन्दर
बस धुआँ सा उठा था
जैसे कोई गरम तवा

गरम तवा ,
जिसपर कुछ सेका गया
बिन चिमटे के,
आग छुई
उँगलियों ने

जब सब कुछ सिक गया
सब कुछ पक गया
गरम तवे को
पानी की बौछार के नीचे रख दिया
जिससे उठा
ढेर सारा धुआँ,
जैसे ग़ुबार
जिसे ख़त्म हो जाना था

क्यूंकि
कुछ जला नहीं था अन्दर
बस धुआँ सा उठा था

जैसे कोई गरम तवा

-प्रकृति

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